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 उत्तर प्रदेश सरकार

अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान
संस्कृति विभाग, उ0प्र0

तुलसी स्मारक भवन ,अयोध्या, उत्तर प्रदेश (भारत) 224123.
सम्पर्कः : +91-9532744231

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अयोध्या शोध संस्थान

रामलीला : रूस

पद्म श्री गेनाडी पेचनिकोव मेमोरियल दिशा राम लीला, मॉस्को, रूस 27 जनवरी 2019 भारद्वाज मंच

रूसी-भारतीय मैत्री समाज ‘दिशा’ अयोध्या अनुसंधान संस्थान, अयोध्या के निमंत्रण पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 27-28 जनवरी 2019 तक आयोजित प्रयागराज में कुंभ मेले में रामलीला का प्रदर्शन करेगी। ये सभी 12 कलाकार स्वर्गीय श्री के शिष्य हैं। गेनाडी पेचनिचोव को रूसी राम के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि रूसी इतिहास में राम लीला 1960 में की गई थी। गेनाडी ने 20 साल तक राम लीला का आयोजन किया। अयोध्या अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. योगेंद्र प्रताप ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सी.एम. योगी आदित्यनाथ, विदेशी कलाकार अयोध्या, उत्तर प्रदेश, भारत में राम लीला करने के लिए आ रहे हैं। ऐसा कहा जाता है कि पदम श्री श्री की स्मृति में पीएम एर्शोव इंस्टीट्यूट ऑफ थियेट्रिकल आर्ट के कलाकारों के ईमानदार प्रयासों के कारण रूसी-भारतीय मैत्री समाज ‘दिशा’ ने 40 साल बाद फिर से राम लीला शुरू की। गेनाडी पेचनिचोव। राम लीला की पहली प्रस्तुति 4-6 नवंबर 2018 को दिवाली के शुभ अवसर पर हुई थी। ‘दिशा’ के अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भारतीय राजदूत एच.ई.डी.बी. वेंकटेश वर्मा, निदेशक अयोध्या शोध संस्थान डॉ. योगेंद्र प्रताप सिंह, साहित्य गंगा के निदेशक डॉ. योगेश दुबे, निदेशक जवाहर लाल नेहरू सांस्कृतिक केंद्र सुश्री महिमा सिकंद, भारतीय दूतावास स्कूल के पीजीटी हिंदी श्री। सुशील कुमार, हिंदी शिक्षक श्री. कुमार विनायक और एस. संतोष मिश्रा, पी.एम.एर्शोव इंस्टीट्यूट ऑफ थियेट्रिकल आर्ट के रेक्टर दशिंस्की विटाली एवगेनिविच, बच्चों के स्कूल ऑफ थियेट्रिकल आर्ट्स “सेम हां” के निदेशक और जीएम पेचनिकोव चिल्ड्रन थिएटर स्मिरनोवा अल्ला लियोनिदोवना।

रूसी कलाकारों द्वारा प्रस्तुत रामलीला का संक्षिप्त दृश्य जानकारी।
1) सीता स्वयंवर
2) राम का अयोध्या में स्वागत
3)रानी कैकयी का वर मांगना
4) राम लक्ष्मण सीता वन गमन
5) सीता हरण
6) राम हनुमान भेंट
7)लंका में सीता
8) हनुमान का लंका जाना
9) राम रावण युद्ध
10) राम सीता का पुनर्मिलन
11) अयोध्या वापस लौटने का दृश्य

अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान

अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान की स्थापना संस्कृति विभाग, उ०प्र० शासन द्वारा एतिहासिक तुलसी भवन, अयोध्या में 18 अगस्त, 1986 को की गयी। यह संस्कृति विभाग की स्वायत्तशासी संस्था है। वस्तुतः अयोध्या की पावन भूमि पर सरयु के तट स्थित रामघाट के निकट गोस्वामी तुलसीदास जी ने सम्वत्‌ 1631 की नवमी तिथि भौमवार को श्रीरामचरित मानस की रचना प्रारम्भ की

कैंप कार्यालय

अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान

अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान की स्थापना संस्कृति विभाग, उ०प्र० शासन द्वारा एतिहासिक तुलसी भवन, अयोध्या में 18 अगस्त, 1986 को की गयी। यह संस्कृति विभाग की स्वायत्तशासी संस्था है। वस्तुतः अयोध्या की पावन भूमि पर सरयु के तट स्थित रामघाट के निकट गोस्वामी तुलसीदास जी ने सम्वत्‌ 1631 की नवमी तिथि भौमवार को श्रीरामचरित मानस की रचना प्रारम्भ की
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