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 उत्तर प्रदेश सरकार

अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान
संस्कृति विभाग, उ0प्र0

तुलसी स्मारक भवन ,अयोध्या, उत्तर प्रदेश (भारत) 224123.
सम्पर्कः : +91-9532744231

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अयोध्या शोध संस्थान

प्राचीन

तिवारी मंदिर

तिवारी मंदिर राष्ट्रीय राजमार्ग पर तुलसी उद्यान के सामने स्थित है। इस मंदिर की प्रबन्ध व्यवस्था बवुआ जी द्वारा की जा रही हैं ।
तिवारी मंदिर राष्ट्रीय राजमार्ग पर तुलसी उद्यान के सामने स्थित है। इस मंदिर की प्रबन्ध व्यवस्था बवुआ जी द्वारा की जा रही हैं ।

क्षीरेश्वर नाथ मंदिर

क्षीरेश्वर नाथ मंदिर राष्ट्रीय राज्य मार्ग के पूर्व में स्थित है । जहाँ पर क्षीर सागर के पश्चिम शिव लिंग स्थापित है। ऐसी मान्यता है कि महाराजा दशरथ ने स्वयं शिव लिंग की स्थापना की थी। शिव लिंग की उपासना करने से सभी इच्छाये पूर्ण होती हैं । यहां पर शिव रात्रि के दिन विशेष पूजा-अर्चना होती है ।

सप्तहरि मंदिर

क्षीरेश्वर नाथ मंदिर राष्ट्रीय राज्य मार्ग के पूर्व में स्थित है । जहाँ पर क्षीर सागर के पश्चिम शिव लिंग स्थापित है। ऐसी मान्यता है कि महाराजा दशरथ ने स्वयं शिव लिंग की स्थापना की थी। शिव लिंग की उपासना करने से सभी इच्छाये पूर्ण होती हैं । यहां पर शिव रात्रि के दिन विशेष पूजा-अर्चना होती है ।

चन्द्रहरि : पौराणिक कथाओं के अनुसार अयोध्या के गौरव और वैभव के दर्शन हेतु महाराज चन्द्रदेव स्वयं यहां आये और विभिन्न तीर्थों की यात्रा की जिससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु यहीं प्रकट हुये । वर्तमान में राम की पैड़ी पर चन्द्रहरि मन्दिर स्थापित है।

धर्महरि : :पौराणिक कथा के अनुसार महाराज धर्मराज यहाँ के गौरव और वैभव के दर्शन हेतु पधारे और अत्यन्त प्रभावित होकर नृत्य करते हुये जयद्योष करने लगे जिससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुय । वर्तमान में मीरापुर मोहल्ले में धर्महरि का मन्दिर है ।

बिल्लहरि : :पौराणिक कथा के अनुसार महाराज धर्मराज यहाँ के गौरव और वैभव के दर्शन हेतु पधारे और अत्यन्त प्रभावित होकर नृत्य करते हुये जयद्योष करने लगे जिससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुय । वर्तमान में मीरापुर मोहल्ले में धर्महरि का मन्दिर है ।

पुण्यहरि : :अयोध्या के निकट पुरा बाजार नामक स्थान से 3 कि0मी0 दूर सरयू के किनारे बिल्लहरि का स्थान है । पौराणिक कथाओं क अनुसार नारद मुनि क श्राप से ग्रसित हो गर्न्धव को बिल्व रूप धारण करना पड़ा और यह स्थान पर निवास कर रहा था कालान्तर में श्रीराम के दर्शन से लभान्वित होकर उसने मूल रूप प्राप्त किया और परमधाम में चला गया । उसने यहाँ पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित की थी ।

गुप्तहरि-चक्रहरि: :सरयू नदी के किनारे गुप्तार घाट नामक स्थान ही गुप्तहरि का स्थान है । किंवदन्तियों के अनुसार देवताओं के विशिष्ठ अनुरोध पर भगवान बिष्णु ने स्वयं यहीं गुप्त रूप से निवास कर तपस्या की थी। इसी से इसका नाम गुप्तहरि पड़ा।

विष्णुहरि: :गुप्तार घाट से पूर्व दिशा में चक्रतीर्थ में विष्णुहरि का स्थान है किंवदन्ति के अनुसार विष्णु शर्मा नामक विद्वान ब्राम्हण ने कठिन तपस्या कर भगवान विष्णु का दर्शन प्राप्त किया ।

अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान

अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान की स्थापना संस्कृति विभाग, उ०प्र० शासन द्वारा एतिहासिक तुलसी भवन, अयोध्या में 18 अगस्त, 1986 को की गयी। यह संस्कृति विभाग की स्वायत्तशासी संस्था है। वस्तुतः अयोध्या की पावन भूमि पर सरयु के तट स्थित रामघाट के निकट गोस्वामी तुलसीदास जी ने सम्वत्‌ 1631 की नवमी तिथि भौमवार को श्रीरामचरित मानस की रचना प्रारम्भ की

कैंप कार्यालय

अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान

अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान की स्थापना संस्कृति विभाग, उ०प्र० शासन द्वारा एतिहासिक तुलसी भवन, अयोध्या में 18 अगस्त, 1986 को की गयी। यह संस्कृति विभाग की स्वायत्तशासी संस्था है। वस्तुतः अयोध्या की पावन भूमि पर सरयु के तट स्थित रामघाट के निकट गोस्वामी तुलसीदास जी ने सम्वत्‌ 1631 की नवमी तिथि भौमवार को श्रीरामचरित मानस की रचना प्रारम्भ की
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