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‘ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण’ के अंतर्गत ‘उत्तर भारत की कला एवं संस्कृति में राम’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

इलाहाबाद संग्रहालय में आज दिनांक 21 मार्च 2022 को अयोध्या शोध संस्थान के सहयोग से ‘ उत्तर भारत की कला एवं संस्कृति में राम’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ इलाहबाद संग्रहालय के पं.वृजमोहन व्यास सभागार में हुआ। उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. कमलेश दत्त त्रिपाठी, कुलाधिपति महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा , विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ राकेश तिवारी, पूर्व महानिदेशक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग दिल्ली, व सभाध्यक्ष के रूप में परमपूज्य स्वामी श्री मिथलेशनंदिनीशरण जी महाराज, अयोध्या उपस्थित रहे।दीप प्रज्जवलन व डॉ अंकिता चतुर्वेदी मालवीय द्वारा मंगलाचरण से संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। स्वागत वक्तव्य के रूप में डॉ लवकुश द्विवेदी, निदेशक अयोध्या शोध संस्थान, लखनऊ ने सभी आमंत्रित विद्वतजनों व उपस्थित सुधी श्रोताओं का दोनों संस्थाओं की तरफ से स्वागत करते हुए कहा कि न केवल वृहत्तर भारत वरन सम्पूर्ण विश्व परिदृश्य में राम व रामकथा के प्रमाणिक साक्ष्यों की खोज एवं उन्हें प्रकाश में लाना ही  ‘ग्लोबल इन्साइक्लोपीडिया आफ द रामायण’ के अन्तर्गत आयोजित इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने सभी सुधी जनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर इस महान कार्य में संस्थान का सहयोग करने का निवेदन भी किया। उद्घाटन वक्तव्य में प्रोफेसर कमलेश दत्त त्रिपाठी ने भारतीय संस्कृति के सभी पक्षों कला-मूर्ति/चित्रकला/लघु चित्र/लोक में रामाख्यान से ओतप्रोत बताया।राम व रामकथा की प्रमाणिकता पर प्रोफेसर त्रिपाठी ने कहा कि जो हमारे हृदय में विद्यमान है हम उसे संदिग्ध कैसे मान सकते हैं। जिसके आरंभिक प्रमाण हमें नचनाकुठार व देवगढ़ मंदिर में प्रकट मिलते हैं। अन्ततः उन्होंने राम कथा की सुदीर्घ परंपरा जो चौथी, पांचवीं सदी में प्रकट होती है और पश्चात काल में क्यों यदा कदा खंडित रही इस पर भी संगोष्ठी में विचार किया जाएगा।

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अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान

अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान की स्थापना संस्कृति विभाग, उ०प्र० शासन द्वारा एतिहासिक तुलसी भवन, अयोध्या में 18 अगस्त, 1986 को की गयी। यह संस्कृति विभाग की स्वायत्तशासी संस्था है। वस्तुतः अयोध्या की पावन भूमि पर सरयु के तट स्थित रामघाट के निकट गोस्वामी तुलसीदास जी ने सम्वत्‌ 1631 की नवमी तिथि भौमवार को श्रीरामचरित मानस की रचना प्रारम्भ की

कैंप कार्यालय

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