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 उत्तर प्रदेश सरकार

अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान
संस्कृति विभाग, उ0प्र0

तुलसी स्मारक भवन ,अयोध्या, उत्तर प्रदेश (भारत) 224123.
सम्पर्कः : +91-9532744231

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अयोध्या शोध संस्थान

ब्रिटिश काल

ब्रिटिश काल

अग्रेजों का शासन प्रारम्भ होने से नगर के सांस्कृतिक भूदॄश्य में काफी परिवर्तन हुआ । अंग्रेजों ने यहॉ की सकरी गलियों को चोड़ा करवाया, पक्की सड़के बनवायी, रेल परिवहन की सुविधा हो जाने के फलस्वरूप भारत तथा अन्य राज्यों के अनेक राजा-महराजाओं ने यहॉ बड़े-बडे मंदिर बनवा दिये । ध्वस्त मंदिरों का पुनर्निर्माण हुआ, मंदिरों की सख्या में बृद्धि होने के साथ-साथ मुख्य सड़क के दोनों ओर तथा राजसदन से सटे पश्चिम में मुख्य व्यापारिक क्षेत्र की स्थापना हुई । इस व्यापारिक क्षेत्र का नाम रानीबाजार था जो अपने पूर्व रुप में आज विद्यमान नहीं है| अन्य नगरों की तुलना में यहॉ किसी प्रकार के उद्योग धंधे या प्रशासनिक कार्यालयों की स्थापना न होने से इसके नगरीय भूदृश्य का बाहय प्रसार नहीं हो पाया और यह “मंदिरों का नगर” के रुप में विद्यमान रहा ।

अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान

अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान की स्थापना संस्कृति विभाग, उ०प्र० शासन द्वारा एतिहासिक तुलसी भवन, अयोध्या में 18 अगस्त, 1986 को की गयी। यह संस्कृति विभाग की स्वायत्तशासी संस्था है। वस्तुतः अयोध्या की पावन भूमि पर सरयु के तट स्थित रामघाट के निकट गोस्वामी तुलसीदास जी ने सम्वत्‌ 1631 की नवमी तिथि भौमवार को श्रीरामचरित मानस की रचना प्रारम्भ की

कैंप कार्यालय

अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान

अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान की स्थापना संस्कृति विभाग, उ०प्र० शासन द्वारा एतिहासिक तुलसी भवन, अयोध्या में 18 अगस्त, 1986 को की गयी। यह संस्कृति विभाग की स्वायत्तशासी संस्था है। वस्तुतः अयोध्या की पावन भूमि पर सरयु के तट स्थित रामघाट के निकट गोस्वामी तुलसीदास जी ने सम्वत्‌ 1631 की नवमी तिथि भौमवार को श्रीरामचरित मानस की रचना प्रारम्भ की
कैंप कार्यालय

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