Skip to content Skip to footer

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री ने किया लोकार्पण अयोध्या पंचांग रामलीला की सांस्कृतिक विरासत को दीर्घजीवी बनाएगा : माननीय मंत्री श्री जयवीर सिंह

पर्यटन भवन में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री ने किया अयोध्या शोध संस्थान के पंचांग का लोकार्पण

लखनऊ, 02 मई (हि.स़.)। उत्तर प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने अयोध्या शोध संस्थान के पंचांग का सोमवार को लोकापर्ण किया। गोमती नगर स्थित पर्यटन भवन में आयोजित पंचाग के लोकापर्ण समारोह में संस्कृति मंत्री ने कहा कि इस पंचांग वैश्विक रामलीला, भारतीय नवसंवत्सर एवं अंग्रेजी तिथियों के आधार पर अनेक महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल की गई है। ऐसे प्रयास रामलीला की सांस्कृतिक विरासत का न सिर्फ एक स्थान पर परिचय देते हैं बल्कि उसे दीर्घजीवी भी बनाते हैं।

समारोह में संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव तथा अयोध्या शोध संस्थान के अध्यक्ष मुकेश मेश्राम ने कहाकि यह पंचांग प्रदेश, देश एवं विश्व की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का महत्वपूर्ण प्रयास है।

उन्होंने कहा कि संस्थान पिछले कई वर्षों से पंचांग के माध्यम से इस दायित्व का निर्वाह कर रहा है। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ.लवकुश द्विवेदी ने कहा कि संस्थान का यह वार्षिक पंचांग श्रीराम की संस्कृति को वैश्विक पटल पर ले जाने में सहायक होगा। समारोह में संस्कृति निदेशालय के सहायक निदेशक अमित अग्निहोत्री सहित संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के कई प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे।

विभिन्न देशों की रामलीला को दर्शाता है पंचांग

अयोध्या पंचांग विक्रम संवंत 2079, शक संवंत 1944 तथा सन् 2022-23 पर आधारित है । यह रामलीला के आकर्षक चित्रों से युक्त है। पंचांग में नेपाल, इंडोनेशिया, कंबोडिया, रूस, थाईलैंड, बाली, श्रीलंका, सूरीनाम, त्रिनिदाद एवं टोबेगो जैसे देशों की प्रसिद्ध रामलीला के साथ ही देश के जम्मू, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्यप्रदेश, नई दिल्ली के रामलीला के आकर्षक चित्र शामिल किए गए हैं। साथ ही पंचांग में प्रदेश के वाराणसी, रामनगर, अयोध्या, गोरखपुर, प्रयागराज, उरई, अकबरपुर, बलिया, जसवंत नगर, फिरोजाबाद की रामलीला के विविध प्रसंगों को दर्शाया गया है। पंचांग में रामलीला में प्रयोग होने वाले मुखौटों के चित्र भी दिए गए हैं। पंचांग में व्रत, उत्सव, पर्व, मुहूर्त, सूर्याेदय, सूर्यास्त सहित विविध जानकारियों से परिपूर्ण है।

What's your reaction?
0Cool0Bad0Happy0Sad

अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान

अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान की स्थापना संस्कृति विभाग, उ०प्र० शासन द्वारा एतिहासिक तुलसी भवन, अयोध्या में 18 अगस्त, 1986 को की गयी। यह संस्कृति विभाग की स्वायत्तशासी संस्था है। वस्तुतः अयोध्या की पावन भूमि पर सरयु के तट स्थित रामघाट के निकट गोस्वामी तुलसीदास जी ने सम्वत्‌ 1631 की नवमी तिथि भौमवार को श्रीरामचरित मानस की रचना प्रारम्भ की

कैंप कार्यालय

अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान

अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान की स्थापना संस्कृति विभाग, उ०प्र० शासन द्वारा एतिहासिक तुलसी भवन, अयोध्या में 18 अगस्त, 1986 को की गयी। यह संस्कृति विभाग की स्वायत्तशासी संस्था है। वस्तुतः अयोध्या की पावन भूमि पर सरयु के तट स्थित रामघाट के निकट गोस्वामी तुलसीदास जी ने सम्वत्‌ 1631 की नवमी तिथि भौमवार को श्रीरामचरित मानस की रचना प्रारम्भ की
कैंप कार्यालय

कॉपीराइट ©2024 अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान उ.प्र.| सॉफ्टजेन टेक्नोलॉजीज द्वारा डिजाइन व डेवलप