अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान संस्कृति विभाग, उ0प्र0

अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान संस्कृति विभाग, उ0प्र0

तुलसी स्मारक भवन ,अयोध्या, उत्तर प्रदेश (भारत) 224123

नवयुग कन्या महाविद्यालय लखनऊ में अन्तर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान, अयोध्या (संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश)के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर मंजुला उपाध्याय की अध्यक्षता में आयोजित नारी शक्ति वंदन के अंतर्गत सीता तत्व परिसंवाद एवं रामायण शक्ति तत्व उत्सव के परिप्रेक्ष्य में एक दिवसीय संगोष्ठी, संभाषण प्रतियोगिता एवं सांस्कृतिक उत्सव का आयोजन नवयुग कन्या महाविद्यालय की मिशन शक्ति समिति की संयोजिका प्रोफेसर नीतू सिंह एवं भारतीय भाषा संस्कृति और कला समिति , अहिल्याबाई होलकर समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम तीन सत्रों में आयोजित किया गया कार्यक्रम का प्रारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन के साथ किया गया।उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ अपूर्वा अवस्थी द्वारा किया गया।प्रथम सत्र का मंच संचालन प्रो सीमा सरकार द्वारा किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में सम्मानित अतिथि वक्ता को अंगवस्त्रम्, स्मृति चिन्ह एवं पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक पौध रामायण पुस्तक राम दरबार देकर सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय संगोष्ठी का मुख्य विषय “सीता तत्व परिसंवाद” विषय पर विशिष्ट वक्ता वरिष्ठ पत्रकार श्रीमती शिल्पी सेन ने कहा कि रामकथा के केंद्र में राम ही आदर्श है रामायण के सभी पात्र अपनी शक्तियों से राम को और अधिक प्रभावी बनाते हैं। सीता के बिना राम मर्यादा पुरुषोत्तम नहीं हो सकते हैं। रामायण के महिला पात्रों की शक्ति अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है। रामचरित मानस के संकल्प को प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में लाना चाहिए।
इसी क्रम में विशिष्ट वक्ता डीन अभिनव गुप्त संस्थान लखनऊ विश्वविद्यालय की प्रोफेसर भुवनेश्वरी भारद्वाज ने कहा कि रामायण में राम और सीता एक पात्र नहीं है बल्कि पुरुष और स्त्री तत्व का अनादि संयोग है। सीता का चरित्र केवल धार्मिक नहीं बल्कि नैतिक, सामाजिक और मानवीय मूल्यों का भी प्रतीक है सीता चरित्र से समाज को नारी सम्मान और गरिमा का संदेश मिलता है।
गणमान्य वरिष्ठ साहित्यकार विशिष्ट वक्ता श्री पद्मनाभ ने अपने उद्बोधन में कहा कि सीता माता ने धरती माता में समा जाना स्वीकार किया लेकिन आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया। सीता का चरित्र आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना प्राचीन काल में था। सीता का चरित्र हमें सिखाता है कि जीवन में धैर्य, नैतिकता, आत्मसम्मान और कर्तव्यनिष्ठा जैसे गुणों को अपनाकर ही एक संतुलित और आदर्श जीवन जिया जा सकता है। सीता का चरित्र बहुत बहु आयामी है और महनीय है ।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो मंजुला उपाध्याय ने कहा कि नारी सशक्तिकरण के लिए रामायण से लेकर आधुनिक इतिहास की बहुत सी नारियां हमारी आदर्श रहीं हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम अभियान द्वारा नारी सशक्तिकरण को नवोन्मेषी आयाम प्राप्त होंगे। नारी के सशक्त होने पर राज्य की संरचना दृढ़ होती है और राज्य की दृढ़ता से राष्ट्र का गौरव परिपुष्ट होता है।
भोजनावकाश के बाद
द्वितीय सत्र में संभाषण प्रतियोगिता प्रारंभ हुई जिसका विषय ‘रामायण की विभिन्न नारी शक्ति पात्र ‘विषय पर आधारित थी। इसमें छात्राओं ने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया। निर्णायक मंडल में आकाशवाणी एवं दूरदर्शन की कलाकार श्रीमती आशा श्रीवास्तव तथा प्रोफेसर सुषमा त्रिवेदी रहीं। संभाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान कुमारी आस्था त्रिपाठी
द्वितीय स्थान शांभवी गुप्ता तृतीय पुरस्कार महिमा कनौजिया को प्राप्त हुआ।अतिथियों द्वारा पुरस्कार में रामचरित मानस की पुस्तकें और प्रमाण पत्र तथा राम दरबार स्मृति चिन्हृ पुरस्कार रुप में दिया गया। सांत्वना पुरस्कार लक्षिका किशोर एवं निधि वाजपेई को मिला।इस सत्र का संचालन डॉ अपूर्वा अवस्थी द्वारा किया गया।
तृतीय सत्र में सांस्कृतिक उत्सव कार्यक्रम ‘रामायण में नारी शक्ति उत्सव’ पर आधारित रहा। नृत्य कला का प्रदर्शन, सांस्कृतिक प्रस्तुति नाटिका व एकल अभिनय मंदोदरी,शबरी आदि की प्रस्तुति काव्योम फाउंडेशन संस्था के कलाकारों द्वारा तथा रामायण चौपाइयों का गायन महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा श्रीराम जी के 108 नामों की संस्कृत प्रस्तुति श्रीमती आशा श्रीवास्तव जी के द्वारा किया गया। इस सत्र का संचालन प्रोफेसर सीमा सरकार द्वारा किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की सम्मानित प्रवक्ताएं विभिन्न आयोजन समिति के सदस्य एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी गण तथा महाविद्यालय की छात्राएं उपस्थित रहीं। धन्यवाद ज्ञापन शिक्षा शास्त्र विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सीमा पांडे द्वारा किया गया।कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत वंदे मातरम द्वारा किया गया।अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान अयोध्या की ओर से 20 अप्रैल तक प्रदेश के कई जनपदों में नारी शक्ति वंदन के अंतर्गत सीता तत्व परिसंवाद, रामायण शक्ति तत्व उत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
आज शनिवार को चित्रकूट के श्री तुलसी दास स्नातकोत्तर महाविद्यालय कर्वी चित्रकूट में उक्त कार्यक्रम का सार्थक और भव्य आयोजन किया जा रहा है।
इसके अंतर्गत विद्वानों द्वारा रामायण के स्त्री पात्रों के व्यक्तित्व, गौरव, नैतिकता, धैर्य को रेखांकित किया।
सीताजी, अहिल्या, उर्मिला आदि स्त्री पात्रों पर विद्यार्थियों के मध्य भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
तीसरे चरण में रामायण के स्त्री पात्रों के मर्म को दर्शाने के लिए गायन, नृत्य नाटिका और काव्य अर्चन का आयोजन किया गया।